झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का प्रदर्शन आज 20वें दिन में प्रवेश कर चुका है और आंदोलनकारी अपनी मांगों के पूरा होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 'JPSC-JSSC Reforms Manch' के बैनर तले छात्र लगातार डटे हुए हैं, और उनकी मांग है कि भर्ती परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता बरती जाए।
आज के घटनाक्रम के अनुसार, इस आंदोलन को लेकर राजनीतिक सरगर्मियाँ भी तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सीबीआई जाँच की उनकी मांग नहीं मानी गई, तो वह खुद आमरण अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने 2024 की एक्साइज कांस्टेबल शारीरिक परीक्षा के दौरान जान गंवाने वाले 19 लोगों के परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये के मुआवजे की भी मांग की है।
दूसरी ओर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इस मुद्दे पर देश भर के 1,200 से अधिक विश्वविद्यालयों में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। एबीवीपी के नेताओं ने राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए, उसकी संरचना में बार-बार किए गए बदलावों को लेकर चिंता जताई है।
इन सबके बीच, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता देवेंद्र नाथ महतो, जो आमरण अनशन पर थे, की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।
जहाँ एक तरफ बीजेपी राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर आंदोलन को दबाने का आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी छात्रों के आंदोलन का राजनीतिकरण कर रही है और मामले को बिगाड़ने का प्रयास कर रही है।
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